शासकीय आवासों के रखरखाव में अनियमिताएं
शासकीय आवासों में लोक निर्माण विभाग,नगर निगम तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग व्दारा जल प्रदाय के सम्बन्ध में लापरवाही का मामला सामने आया है। मेरे व्दारा अनेकों बार निवेदन करने पर भी उक्त विभागों व्दारा मेरे निवास पर जल प्रदाय की समुचित व्यवस्था नहीं की है। इस संबंध मे मैंने जन शिकायत विभाग को निम्नानुसार शिकायत प्रस्तुत की हैः.
चाणक्य ने भ्रष्टाचार को कई श्रेणियों में विभक्त किया है। यदि हम भ्रष्टाचार पर विचार करें तो पता चलता है कि प्रशासन तंत्र में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यह बताना आसान है कि प्रत्येक कर्मी,चाहे वह अधिकारी हो या कर्मचारी ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार में लिप्त है। यह अधिकारी कर्मचारी शासन तथा जनता से भ्रष्टाचार के माध्यम से ऐन केन प्रकरेण कमाई चाहता है। यह नई बात नहीं है किन्तु इस पर अंकुश लगाया जाना भी आसान नहीं है लेकिन चूंकि कुछ तो किया जाना चाहिए। शिकायत करें तो किससे करें। जिससे शिकायत करें वह स्वयं ही कुछ सुनने को तैयार नहीं है तो फिर आम व्यक्ति जाएं तो कहां । यह सोचने का विषय है। जुगाडगिरी के इस समय में यहां से वहां तक जुगाड लगाना कहां का न्याय है। इसी तरह मैंने भी मुझे आवंटित शासकीय आवास क्रमांक 111.46 शिवाजी नगर ,भोपाल मे जल प्रदाय के संबंध में ऊपर से नीचे तक निवेदन किया किन्तु कोई सुनने को तैयार नहीं है। जनवरी 2008 से मेरे शासकीय निवास में जल प्रदाय अति धीमा हो गया है। इस संबंध में मैंने लोक निर्माण विभाग,नगर निगम कार्यालय तथा लोक स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों अधिकारियों से कई बार संपर्क किया किन्तु जनवरी 2008 से यह आवेदन लिखने तक न तो लोक निर्माण विभाग, न नगर निगम कार्यालय तथा न लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों व्दारा कोई व्वस्था की गई। लोक निर्माण विभाग व्दारा कहा जाता है कि नगर निगम व्दारा पानी की सप्लाई की जाएगी । नगर निगम व्दारा कहा जाता है कि यह कार्य पी एच ई व्दारा किया जाएगा । नगर निगम व्दारा किसी सुबोध जैन उपयंत्री से संपर्क करने हेतु कहा गया। श्री सुबोध जैन उपयंत्री मोबाइल क्रमांक 9425600451 से संपर्क किया गया। श्री जैन ने पी एच ई के एक कर्मचारी को मेरे शासकीय आवास पर भेजा। उक्त कर्मचारी ने बताया कि नई पाइप लाइन डलवाना होगी जिसकी लागत लगभग दो हजार के आसपास हो सकती है। यह व्यवस्था या तो स्वयं करें या लोक निर्माण विभाग से कराएं। लोक निर्माण विभाग से निवेदन किया गया किन्तु उनके व्दारा कोई नोटिस नहीं लिया गया। बल्कि यह हो रहा है कि लोक निर्माण विभाग व्दारा जुगाडगिरी और ऐनकेन कार्य करानेवालों के निवासों पर शासकीय व्यय से तरह तरह के कार्य कराये जा रहे है। इस तरह तरह के कार्यों के पीछे क्या दृष्टकोण हो सकता है। यह प्रश्न उपस्थित होता है। असल में हमारी पूरी प्रशासकीय व्यवस्था ही चरमरा गई है कि अब इसका इलाज किया जाना ही कठिन हो गया है। होता यह है कि जुगाडवादी शक्तियां अब प्रशासन पर हावी हो रही है या हो गई है। इस जुगाडवादियों के आगे हमारी सरकार बिल्कुल पंगु हो गई है।यह चिन्ता का विषय है। मेरा निवेदन केवल शिकायत तक सीमित नहीं है अपितु उस व्यवस्था पर चिन्ता का विषय भी है जिस व्यवस्था में हम आप उठते बैठते है। हमारी इस प्रशासन व्यवस्था में सीधी अंगुली घी नहीं निकलता लेकिन इसके लिए अंगुली टेड़ी करनी होती है लेकिन हो रहा है कि टेड़ी अंगुली करनेवालों की अंगुलियां काट दी जाती है। मुझे अफसोस तो यह होता है कि जुगाडवादी लोग प्रशासन को घूंस की तरह चट कर रहे है। इसमें ऊपर से नीचे तक व्यवस्थापकों का ज्यादा हाथ प्रतीत होता है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि आज का शासकीय कर्मचारी केवल कर्मचारी ही नहीं है अपितु वह एक जागरूक व्यक्ति भी है। इसीलिए मैa निवेदन करना चाहूंगा कि प्रशासकीय व्यवस्था यदि जागरूक हो तो किसी को किसी शिकायत का अवसर ही नहीं मिलेगा । किन्तु ऐसा होन कठिन ही नहीं अत्यन्त कठिन है। अन्त में निवेदन है कि यदि मेरे अनुरोध पर जरा भी ध्यान दिया हो तो कृपया मेरे निवास पर जल प्रदाय की व्यवस्था दुरूस्थ करवाने की व्यवस्था करें।
भवदीय ः शंकर सोनाने
लोक निर्माण विभाग व्दारा शासकीय आवासों पर की जा रही व्यवस्थाएं केवल उन्ही आवासों में होती है जिनमें उच्चस्तर के अधिकारी हो या भ्रष्ट तरीके से कार्य करवाने की कृत करते हो । सामान्यतः लोक निर्माण विभाग से किसी तरह की आशा की जाना एक स्वप्न ही प्रतीत होता है। अब यह देखना है कि लोक निर्माण विभाग मेरे आवास पर कब जल प्रदाय की व्यवस्था सुचारू रूप से करने लगेगा ।
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